सिस्टम विकास चक्र के विभिन्न चरण ( 8 Phases) कौन कौन से हैं हिंदी।

नमस्कार दोस्तों, इस पोस्ट में आपको सिस्टम विकास चक्र के विभिन्न चरण ( 8 Phases) कौन कौन से हैं हिंदी। के बारे में पूरी जांनकारी देगे जिससे आपको जो कि कंप्यूटर में अहम् भूमिका निभाता है सिस्टम विकास चक्र विकास का प्रोसेस (The process of development) और सिस्टम का प्रयोग करने के लिए मुख्य बिंदुओं के समूह का अनुसरण किया जाता है सिस्टम डेवलपमेंट (System development) बर्थ-टू-मेच्योर (Birth to mature) प्रक्रिया है इस पोस्ट में आपको स्टेप by स्टेप आपको सिस्टम विकास चक्र को आसानी से जान पाओगे तो चलिए शरू करते है –

 

सिस्टम विकास चक्र के विभिन्न चरण (Phases) 

सिस्टम विकास जीवन चक्र के विभिन्न चरण निम्नलिखित हैं।

  1. प्रिलिमनरी इन्वेस्टिगेशन या प्रोबलम फॉर्मूलेशन (Preliminary Investigation or Problem Formulation)
  2. फीजिबिलिटी स्टडी (Feasibility Study)
  3. सिस्टम विश्लेषण (System Analysis)
  4. सिस्टम डिजाइन (System Design)
  5. सॉफ्टवेयर का विकास (Development of Software)
  6. सिस्टम परीक्षण (System Testing)
  7. सिस्टम इंप्लीमेंटेशन तथा इवोल्यूशन (System Implementation and Evaluation)
  8. रखरखाव (Maintenance)

 

सिस्टम विकास चक्र के चरण की विस्तार से जानकारी 

सिस्टम विकास चक्र को अच्छे से जानने के लिए हमें सिस्टम के हर चरण को जानना और समझाना बहुत जरूरी होता है  जिससे हम इसको भलीभांति अपने लिए उपयोग में ला सके।

आइये दोस्तों शुरू करते है – 

 1. प्रिलिमनरी इन्वेस्टिगेशन या प्रोबलम फॉर्मूलेशन (Preliminary  Investigation or Problem Formulation)-

  • सबसे जटिल समस्या किसी चलते हुए सिस्टम में वास्तविक समस्या को पता लगाना है| सिस्टम में समस्या प्रॉब्लम को जाने बिना आगे कोई भी काम करना प्रयास को असफल करना है।
  • किसी भी सिस्टम में समस्या की परिभाषा यूजर की आवश्यकताओं को परिभाषित करती है या यूजर की सिस्टम से जो आशा होती है उसे परिभाषित करती है।
  • सबसे पहले सिस्टम लिस्ट समस्या का पता करके उसको परिभाषित करता है।
  • यह चरण प्रोजेक्ट की सीमाओं को बताता है इस चरण के अंतर्गत सिस्टम के किन भागों को बदलना है और किन भागों को नहीं बदलना है इन कामों को परिभाषित किया जाता है।

सिस्टम के विकास चक्र में प्रोबलम आईडेंटिफिकेशन निम्नलिखित बिंदुओं में सहायता करता है।

  1. समस्याओं को इंगित करना ।
  2. सिस्टम के उद्देश्य को सामान्य तरीके से सेट करना ।
  3. उपलब्ध एसोसिएट की सीमाओं के द्वारा प्रोजेक्ट की सीमाओं को बताना।

 

2. फीजिबिलिटी स्टडी (Feasibility Study)-

  • फीजिबिलिटी स्टडी के अंतर्गत एग्जीक्यूटिव सिस्टम में थोड़ा सुधार करना या पूरी तरह से नई सिस्टम का विकास करना आता है।
  • यह विचारधारा समस्या की ओवरव्यू को प्राप्त करने में सहायता करती है फीजिबिलिटी स्टडी यह सुनिश्चित करने के लिए की जाती है।
  • इसमें प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाना है या प्रोजेक्ट को पोस्टपोन या कैंसिल करना है।

 

3. सिस्टम विश्लेषण  (System Analysis)-

सिस्टम विश्लेषण सिस्टम विकास जीवन चक्र का अत्यंत महत्वपूर्ण चरण है।

विभिन्न सिस्टम घटकों के बीच संबंध और वातावरण को विचार करना और समझना इस चरण के अंतर्गत आता है।

इसके लिए भिन्न-भिन्न माध्यमों से आंकड़ों को इकट्ठा करने की आवश्यकता होती है ये माध्यम प्रश्नावली, साक्षात्कार, बातचीत तत्काल उपलब्ध डाटा आदि में प्रयोग होते हैं।

 विश्लेषण के एनालिसिस निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर के लिए प्रयास करता है।

  1. संगठन में किस तरह के काम होते हैं?
  2. यह किस तरह के काम करता है?
  3. किस प्रकार की समस्या उत्पन्न होती हैं?
  4. ट्रांजैक्शन का वॉल्यूम क्या है?
  5. यदि समस्या सामने आती है तो उसका क्या हल है?

इन प्रश्नों का जवाब देने के लिए सिस्टम एनालिस्ट को अलग-अलग तरह के लोगों से जानकारी लेने चाहिए उसे व्यापार की पूरी और व्यवस्थित जानकारी होनी चाहिए सिस्टम विश्लेषण के को समस्या के कारणों का पता होना चाहिए उन समस्याओं को दूर करने के लिए उसके उपयोग की जानकारी भी होनी चाहिए।

 

4. सिस्टम डिजाइन  (System Design)-

  • सिस्टम डिजाइन चरण सिस्टम विश्लेषण के बाद होता है
  • यह चरण सिस्टम विकास जीवन चक्र का सबसे अधिक चुनौती पूर्ण होता है
  • जिस तरह कोई भी आर्किटेक्ट भवन निर्माण की शुरुआत करने से पहले उसे भवन का पूरा डिजाइन या नक्शा पेपर पर बनता है
  • इस प्रकार सिस्टम एनालिस्ट पूरे सिस्टम की रूपरेखा तैयार करता है आधुनिक सिस्टम एनालिसिस कंप्यूटर सॉफ्टवेयर की सहायता से सिस्टम की रूपरेखा तैयार करते हैं।
  • सिस्टम डिजाइन में सिस्टम एनालिस्ट निम्नलिखित कार्य करता है।
  • एनालिस्ट को फाइल स्ट्रक्चर स्टोरेज डिवाइसेज इत्यादि को निश्चित करना चाहिए।
  • इस चरण में डेटाबेस भी डिजाइन होता है।
  • हार्डवेयर कीमत क्षमता स्पीड गलती दल और दूसरे परफॉर्मेंस लक्षण निश्चित होते हैं।
  • ऑर्गेनाइजेशन स्ट्रक्चर में जो बदल हुई उन फॉर्म को आउटलाइन करना।
  • इनपुट, आउटपुट, फाइल, फॉर्म और प्रोसीजर का फॉर्मेट तैयार करना।
  • फ्लोचार्ट, रिकॉर्ड की रूपरेखा के साथ सिस्टम के कार्य निबंध की पूरी योजना तैयार करना।

 

5. सॉफ्टवेयर का विकास (Development of Software)-

  • सिस्टम डिजाइन करने के बाद सॉफ्टवेयर या प्रोग्राम बनाना ही सिस्टम विकास जीवन चक्र का अगला चरण है।
  • डेवलपमेंट वह चरण है जहां सिस्टम डिजाइन की विस्तृत जानकारी वास्तविक रूप में सिस्टम को बनाना तथा निर्माण में प्रयुक्त होती है।
  • इस चरण में सिस्टम वास्तविक रूप से प्रोग्राम में परिवर्तित (change) होता है।
  • सामान्यतः सिस्टम एनालिसिस प्रोग्राम स्वयं तैयार नहीं करता है सिस्टम एनालिस्ट स्वयं में भी प्रोग्राम को लिखने का कार्य करता है।
  • प्रोग्रामरो की क्षमता के अनुसार प्रोग्राम तैयार करने के लिए सिस्टम एनालिस्ट प्रोग्रामरो से कहता है।
  • प्रोग्रामर प्रोग्राम के डॉक्यूमेंटेशन के लिए भी जिम्मेदार होता है।

 

6. सिस्टम परीक्षण (System Testing)-

  • प्रोग्राम बन जाने के बाद प्रोग्राम का परीक्षण सिस्टम विकास चक्र का अगला चरण है जब प्रोग्राम या सॉफ्टवेयर बंद की तैयार हो जाता है तो उसका परीक्षण होता है कि वह सच्चर रूप से काम करता है या नहीं यदि कई प्रोग्राम में अलग-अलग प्रोग्राम तैयार किए हैं तो इनको इकट्ठा करके इंटीग्रेशन सॉफ्टवेयर का रूप देकर पूरे सिस्टम का परीक्षण होता है।
  • सिस्टम की प्लानिंग और सिस्टम सफलता के लिए नियंत्रण किसी सिस्टम की सफलता के लिए एनालिस्ट क्या कर सकता है।
  • पहले एक योजना तैयार की जाती है फिर विभिन्न विधियां त्रिकोण गतिविधियों स्रोतों लागत व समय की सहायता से सिस्टम को पूरा किया जाता है दूसरे एक बड़े प्रोजेक्ट में एक टीम बनाई जाती है जो एनालिस्ट डिजाइनर प्रोग्रामर सलाह कारण व यूजर से मिलकर बनती है यह लोग आपस में संबंधित ज्ञान बांटा का सामूहिक प्रयास के माध्यम से प्रोजेक्ट को पूरा करते हैं।
  • अंत में प्रोजेक्ट को कई उपयोगी भागों में बांट दिया जाता है जिन्हें एनालिसिस से डिजाइनिंग तथा अंपयमेंट टेंशन का नाम दिया जाता है यह संपूर्ण कार्य प्रोजेक्ट मैनेजमेंट के नियंत्रण में होता है एक अच्छे नियंत्रण कंट्रोलर के लिए विभिन्न कार्यकारी यूनिट को तीन एक्स्ट्रा में बांटा जा सकता है।
  • नियंत्रण के उच्च स्तर पर विभिन्न गतिविधियां मिलकर तेज का निर्माण करती हैं यह पेज पूरे प्रोजेक्ट के मुख्य बड़े भाग होते हैं।
  • मध्यम स्तर पर कार्यकारी भाग विभिन्न गतिविधियों से संबंधित कार्यों का समूह होता है जो सिस्टम विकास चेक करें को एक पेज प्रदान करने में सहायक होती है।
  • सबसे निचले स्तर पर कार्यकारी भागों को छोटे-छोटे तस्कीन में विभाजित कर दिया जाता है कोई एक कार्य अन्य कार्यों पर निर्भर नहीं होता है।

 

7. सिस्टम इंप्लीमेंटेशन तथा इवोल्यूशन (System Implementation and Evaluation)-

  • सिस्टम क्रिया में बयान सिस्टम विकास जीवन चक्र का अंतिम चरण है इसके अंतर्गत हार्डवेयर इंस्टॉलेशन प्रोग्राम डाटा संग्रहण आदि को नेटवर्क से जोड़ा जाता है।
  • इस चरण में यूजर सिस्टम का प्रयोग करना शुरू कर देता है इस चरण में सिस्टम को प्रयोग करने वाले यूजरों को ट्रेनिंग देना और डॉक्यूमेंट रेफर करना है।
  • सिस्टम जितना अधिक जटिल होता है यूजर को उसी अनुसार अधिक प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है।

मूल्यांकन – 

नए सिस्टम को क्रियान्वित करने के बाद सिस्टम के बारे में हर स्तर पर यूजर से फीडबैक लिया जाता है| तथा उन सभी योजनाओं की टिप्पणी के आधार पर सिस्टम की सफलता निश्चित होती है इस प्रक्रिया को सिस्टम का मूल्यांकन कहते हैं। 

8. रखरखाव (Maintenance)-

सिस्टम की सफल के क्रियान्वित के बाद सिस्टम विकास जीवन चक्र का रखरखाव चरण का दौर शुरू होता है।

 

FAQ

1. सिस्टम विकास जीवन चक्र के कितने चरण हैं।

   सिस्टम विकास जीवन चक्र के 8 चरण हैं। 

 

2. फीडबैक कब लिया जाता है ?

  नए सिस्टम को क्रियान्वित करने के बाद सिस्टम के बारे में हर स्तर पर यूजर से फीडबैक लिया जाता है।

 

Conclusion (निष्कर्ष)

तो दोस्तों आज आपको इस पोस्ट से सिस्टम विकास चक्र के विभिन्न चरण ( 8 Phases) कौन कौन से हैं हिंदी। के बारे में पूरी जानकारी मिल गई होगी आशा है कि आपको यह पोस्ट हेल्पफुल रही होगी अगर आप इस पोस्ट से रिलेटेड कोई सवाल की जानकारी चाहते है आप comment करे और अपने दोस्तों को शेयर करे।

Leave a Comment